पाकिस्तान संकट: राजनीतिक उथल-पुथल और सैन्य सत्ता की जंग
राजनीतिक अस्थिरता का केंद्र
इमरान खान की पार्टी पीटीआई को खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर रूल लगाने की धमकी मिल रही है, जो केंद्र सरकार और सेना का इमरान समर्थकों पर दबाव दर्शाती है। विपक्षी गठबंधन ने इमरान को जेल में परिवार से मिलने की अनुमति न देने पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। पंजाब और सिंध में पीटीआई का जनसमर्थन बढ़ रहा है, जबकि बलूचिस्तान में क्षेत्रीय अस्मिता का टकराव प्रमुख है।
सैन्य नेतृत्व पर संकट
सेना प्रमुख आसिम मुनीर को चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) बनाने का आदेश 29 नवंबर तक जारी होना था, लेकिन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने नोटिफिकेशन पर हस्ताक्षर नहीं किए, जिससे संवैधानिक संकट गहरा गया। 27वां संविधान संशोधन सेना की शक्तियों को बढ़ाता है, लेकिन नागरिक सरकार की अनिच्छा से सत्ता संघर्ष तेज हो गया। यह स्थिति पाकिस्तान जैसे परमाणु राष्ट्र के लिए सुरक्षा जोखिम पैदा कर रही है।
आर्थिक पतन की भूमिका
विदेशी मुद्रा भंडार न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है, आईएमएफ शर्तें कठोर हैं और खाद्य-ईंधन संकट से बेरोजगारी रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। जनता पारंपरिक शासन से निराश है, जो इमरान की आर्थिक आशाओं को बढ़ावा दे रहा। सेना के पास नियंत्रण की क्षमता है, लेकिन टिकाऊ समाधान नहीं।
भविष्य की आशंकाएं
यह त्रिआयामी युद्ध (सैन्य, राजनीतिक, आर्थिक) विभाजनकारी हिंसा की ओर ले जा सकता है। प्रांतीय विद्रोह और जनआंदोलन सेना की रणनीति को कमजोर कर रहे हैं।
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